छन्दों का परिचय
छन्द एक परिचय छन्द शब्द मूल रूप से छन्दस् छन्दः है। इसका शाब्दिक अर्थ दो है - 'आच्छादित कर देने वाला' और 'आनन्द देने वाला'। लय और ताल से युक्त ध्वनि मनुष्य के दिल पर प्रभाव डाल कर उसे एक विषय में स्थिर कर देती है और मनुष्य उससे प्राप्त आनन्द में डूब जाता है। यही कारण है कि लय और समन्वय रचना छन्द कहलाती है। इसका दूसरा नाम वृत्त है। वृत्त का अर्थ संतुलित रचना है। सर्कल भी छन्द को इसलिए कहते हैं, क्यों कि अर्थ जाने बिना भी सुनने वाला इसके स्वर-लहरी से प्रभावित हो जाता है। यही कारण है कि सभी वेद छन्द-रचना में ही संसार में प्रकट हुए थे। के भेद छन्द मुख्य तो दो प्रकार के हैं: 1) मात्रिक और 2) वार्णिक 1) मात्रिक छन्द: मात्रिक छन्दों में मात्राओं की गिनती की जाती है। 2) वार्णिक छन्दों में वर्णों की संख्या निश्चित होती है और ये लघु और दीर्घ का क्रम भी निश्चित होता है, जब कि मात्रिक छन्नों में इस क्रम का होना अनिवार्य नहीं है। मात्रा और वर्ण को कहते हैं, ये समझिए: मात...